Pahari Lobia, la comida de Uttarakhand es sencilla.पहाड़ी लौबिया

पहाड़ी लौबिया,उत्तराखंड का भोजन साधारण होते हुए भी अत्यधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है।

भारत विविधता और संस्कृति का देश है। यहाँ हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट परंपराएँ, रीति-रिवाज, और खान-पान की विशेषताएँ हैं। इन्हीं विशेषताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है उत्तराखंड का पारंपरिक व्यंजन पहाड़ी लौबिया यह व्यंजन केवल अपनी अद्वितीय स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पोषण गुणों के कारण भी प्रसिद्ध है।

 
जिसे अंग्रेजी में “काउपी” कहा जाता है, एक प्रकार की फलियाँ हैं। यह प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का उत्कृष्ट स्रोत है।  को विभिन्न प्रकार से पकाया जा सकता है और इसका उपयोग कई पारंपरिक और आधुनिक व्यंजनों में किया जाता है। पहाड़ी लौबिया की विशेषताएँ

पहाड़ी लौबिया की विशेषताएँ|
उत्तराखंड का भोजन साधारण होते हुए भी अत्यधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है। यहाँ की जलवायु और मिट्टी में उगने वाली सब्जियाँ और फल विशेष गुणों से भरपूर होते हैं। पहाड़ी लौबिया का व्यंजन इन विशेषताओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे बनाने में स्थानीय मसालों और जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, जो इसे न केवल स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

पहाड़ी लौबिया बनाने के लिए आवश्यक सामग्री निम्नलिखित है:

लौबिया – 1 कप (भीगी हुई)
टमाटर – 2 मध्यम आकार के (बारीक कटे हुए)
प्याज – 1 बड़ा (बारीक कटा हुआ)
लहसुन – 4-5 कलियाँ (कटी हुई)
अदरक – 1 इंच टुकड़ा (कटा हुआ)
हरी मिर्च – 2 (कटी हुई)
धनिया पाउडर – 1 चम्मच
जीरा – 1 चम्मच
हल्दी पाउडर – 1/2 चम्मच
गरम मसाला – 1/2 चम्मच
तेल – 2 चम्मच
नमक – स्वादानुसार
हरा धनिया – सजावट के लिए|
विधि
लौबिया को पकाना: सबसे पहले भीगी हुई लौबिया को प्रेशर कुकर में डालें और उसमें आवश्यक मात्रा में पानी डालकर

2-3 सीटी लगाएं। लौबिया को अच्छी तरह से पकना चाहिए ताकि वह नरम हो जाए।

मसाला तैयार करना: एक कढ़ाई में तेल गरम करें। उसमें जीरा डालें और उसे भुनने दें। इसके बाद प्याज, लहसुन और अदरक डालें और सुनहरा होने तक भूनें। फिर इसमें हरी मिर्च डालें और थोड़ी देर तक पकाएं।

टमाटर और मसाले डालना: अब कढ़ाई में कटे हुए टमाटर डालें और उन्हें नरम होने तक पकाएं। इसके बाद हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और गरम मसाला डालें। मसालों को अच्छी तरह मिलाकर थोड़ी देर तक भूनें ताकि उनका कच्चापन निकल जाए।

लौबिया मिलाना: जब मसाला अच्छी तरह भुन जाए, तो इसमें पकी हुई लौबिया डालें और मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं। इसमें स्वादानुसार नमक डालें और थोड़ी देर तक पकाएं ताकि लौबिया और मसाला अच्छी तरह मिल जाएं।

सजावट: तैयार व्यंजन को एक बर्तन में निकालें और ऊपर से हरे धनिये से सजाएं।

परोसने का तरीका पहाड़ी लौबिया की विशेषताएँ
पहाड़ी लौबिया को गरम-गरम चावल या रोटी के साथ परोसा जा सकता है। इसे रायता या दही के साथ भी खाया जा सकता है। इसका स्वाद इतना अद्वितीय होता है कि यह किसी भी भोजन का मुख्य आकर्षण बन जाता है।

पौष्टिकता और स्वास्थ्य लाभ|
लौबिया प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी का उत्कृष्ट स्रोत है। यह हृदय के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसमें आयरन की भी प्रचुर मात्रा होती है, जो रक्त की कमी को दूर करने में सहायक है। पहाड़ी मसालों और जड़ी-बूटियों का प्रयोग इसे और भी स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। ये मसाले शरीर को गर्म रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

पहाड़ी लौबिया: एक पारंपरिक विरासत|

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में व्यंजनों का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ के व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि उनमें क्षेत्रीय संस्कृति और परंपरा की भी झलक मिलती है। पहाड़ी लौबिया ऐसी ही एक पारंपरिक विरासत है, जो पीढ़ियों से बनाई और खाई जा रही है। यह व्यंजन न केवल स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि जो भी इस क्षेत्र में आता है, वह इस अद्वितीय स्वाद का आनंद लेता है।

पहाड़ी लौबिया उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह व्यंजन न केवल अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके स्वास्थ्यवर्धक गुण भी इसे विशेष बनाते हैं। इसे बनाना सरल है और इसमें प्रयुक्त सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस पारंपरिक व्यंजन का आनंद उठाकर हम न केवल अपने स्वाद को संतुष्ट कर सकते हैं, बल्कि अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकते हैं।

यदि आप कभी उत्तराखंड जाएं, तो वहाँ के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद अवश्य लें।

पहाड़ी लौबिया को अपने भोजन में शामिल करें और इसकी सादगी और पौष्टिकता का आनंद लें। घर पर भी इसे बनाकर देखें और अपने परिवार को इस अद्वितीय व्यंजन से परिचित कराएं। पहाड़ी लौबिया की विशेषताएँ

पहाड़ी लौबिया वास्तव में एक ऐसा व्यंजन है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमारी संस्कृति की समृद्धि को प्रकट करता है। इसे अपने भोजन का हिस्सा बनाकर हम न केवल अपने स्वाद और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखते हैं।

 

https://hi.wikipedia.org/wiki

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