Hill horse gram, also known as kulath, पहाड़ी गहत, जिसे कुलथ भी कहा जाता है,|

पहाड़ी गहत/कुलथ

पहाड़ी गहत, जिसे कुलथ भी कहा जाता है, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में

 

उगाई जाने वाली एक प्रमुख दलहन फसल है।

यह पौष्टिकता और स्वास्थ्य लाभों के कारण सदियों से पहाड़ी जीवन का हिस्सा रही है। गहत एक प्रकार की दाल होती है, जिसे अंग्रेजी में हॉर्स ग्राम (Horse Gram) कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम मैक्रोटाइलेमा यूनिफ्लोरम (Macrotyloma uniflorum) है। also known as kulath

पोषक तत्व
गहत में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, और फास्फोरस भी भरपूर होते हैं। गहत में निम्नलिखित पोषक तत्व प्रमुख होते हैं:

प्रोटीन: 22-24%
कार्बोहाइड्रेट्स: 57-60%
फाइबर: 5-7%
वसा: 0.5-1.5%
स्वास्थ्य लाभ

गहत के विभिन्न स्वास्थ्य लाभ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:

किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी): गहत के सेवन से गुर्दे की पथरी के निवारण और उपचार में सहायता मिलती है।
डायबिटीज: इसमें पाए जाने वाले फाइबर और प्रोटीन डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभकारी होते हैं।
वजन कम करना: गहत का कम कैलोरी और उच्च फाइबर सामग्री वजन कम करने में मदद करता है।
हड्डियों की मजबूती: इसमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
प्रतिरक्षा तंत्र: गहत का नियमित सेवन प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है।
परंपरागत उपयोग|also known as kulath
पहाड़ी क्षेत्रों में गहत का उपयोग विभिन्न प्रकार से किया जाता है। गहत की दाल, सूप, चटनी, और परांठे प्रमुख व्यंजन हैं। इसे पकाने के विभिन्न तरीके निम्नलिखित हैं:

गहत की दाल: इसे साधारण दाल की तरह पकाया जाता है।

भिगोई हुई गहत को मसालों के साथ पकाकर स्वादिष्ट दाल बनाई जाती है।

गहत का सूप: सर्दियों में गर्म गहत का सूप स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक होता है।
गहत की चटनी: भुनी हुई गहत को पीसकर चटनी बनाई जाती है, जो स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है।
गहत के परांठे: गहत की पकी हुई दाल से भरे परांठे पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं।
खेती और उत्पादन
गहत की खेती पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से की जाती है। यह फसल सूखे क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है। गहत की खेती के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है:

भूमि और जलवायु: गहत की खेती के लिए बलुई और दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है।

यह फसल 25-30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अच्छी होती है।

बुवाई का समय: गहत की बुवाई जून-जुलाई के महीनों में की जाती है।
सिंचाई: गहत को कम पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए इसे बारिश के मौसम में बिना सिंचाई के भी उगाया जा सकता है।

कटाई और भंडारण: गहत की फसल को पकने के बाद काटा जाता है|

और अच्छी तरह सुखाकर भंडारित किया जाता है।

सामाजिक और आर्थिक महत्व|also known as kulath
गहत का सामाजिक और आर्थिक महत्व भी अत्यधिक है। पहाड़ी क्षेत्रों में यह खाद्य सुरक्षा और पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा, गहत की खेती से किसानों को आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है। बाजार में गहत की अच्छी मांग होने के कारण यह एक लाभकारी फसल है।

निष्कर्ष
पहाड़ी गहत या कुलथ केवल एक फसल नहीं है, बल्कि यह पहाड़ी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

इसकी पौष्टिकता और स्वास्थ्य लाभ इसे विशेष बनाते हैं। परंपरागत व्यंजनों से लेकर आधुनिक व्यंजन तक, गहत का उपयोग विभिन्न रूपों में होता है। इसकी खेती से न केवल किसानों को आर्थिक लाभ होता है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा और पोषण का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए, गहत की खेती और इसके उपभोग को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

 

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