Grano de Paharia Jhangora, un tesoro de la región del Himalaya.

पहाड़िया अनाज झंगोरा हिमालयी क्षेत्र का एक खजाना| है।

झंगोरा, जिसे ‘बर्नयार्ड मिलेट’ के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अनाज है। यह अनाज ना केवल पहाड़ी जनजीवन का अभिन्न हिस्सा है बल्कि इसकी खेती और उपभोग स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में भी गहराई से रचा-बसा है। झंगोरा पौष्टिक तत्वों से भरपूर और विभिन्न स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाला अनाज है, जो आधुनिक जीवनशैली के लिए अत्यंत उपयुक्त है।  पहाड़िया अनाज झंगोरा हिमालयी

इतिहास और पारंपरिक महत्व|

झंगोरा की खेती का इतिहास सदियों पुराना है।

यह अनाज पहाड़ी इलाकों में आदिकाल से उगाया जा रहा है और इसकी खेती स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल है। झंगोरा पारंपरिक पर्वतीय भोजन का एक मुख्य हिस्सा है और इसे विभिन्न प्रकार के पकवानों में प्रयोग किया जाता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर झंगोरा से बने व्यंजन विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं, जो इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्वता को दर्शाते हैं।

पौष्टिकता और स्वास्थ्य लाभ|
झंगोरा में उच्च मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, और विभिन्न विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। यह ग्लूटेन-मुक्त होता है, जिससे यह ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले लोगों के लिए एक आदर्श अनाज बनता है। झंगोरा के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं:

पाचन तंत्र के लिए लाभकारी: फाइबर की उच्च मात्रा के कारण, झंगोरा पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत प्रदान करता है। पहाड़िया अनाज झंगोरा हिमालयी
हृदय स्वास्थ्य: इसमें मौजूद मैग्नीशियम और पोटेशियम हृदय को स्वस्थ रखते हैं और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं।
वजन नियंत्रण: यह अनाज कम कैलोरी और उच्च फाइबर युक्त होता है, जिससे यह वजन नियंत्रित करने में सहायक होता है।
डायबिटीज प्रबंधन: कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण, यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
झंगोरा की खेती|

झंगोरा की खेती पहाड़ी क्षेत्रों में मुख्यतः बरसात के मौसम में की जाती है।

 

यह अनाज कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी अच्छी तरह उगता है और न्यूनतम जल की आवश्यकता होती है। झंगोरा की खेती निम्नलिखित चरणों में की जाती है:

भूमि की तैयारी: पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान वाली जमीन को समतल करके खेती के लिए तैयार किया जाता है।
बीजारोपण: जून-जुलाई के महीनों में बीज बोए जाते हैं।
सिंचाई और देखभाल: मानसून के जल पर निर्भर खेती में सिंचाई की न्यूनतम आवश्यकता होती है, लेकिन फसल की निरंतर निगरानी आवश्यक है।

कटाई: अक्टूबर-नवंबर में फसल पकने पर इसकी कटाई की जाती है।

झंगोरा के विविध उपयोग|

झंगोरा का उपयोग विभिन्न प्रकार के पकवानों में किया जाता है। यह चावल की तरह पकाया जा सकता है और इसके आटे से भी विभिन्न प्रकार की रोटियां और मिठाइयाँ बनाई जा सकती हैं। कुछ प्रमुख झंगोरा से बनने वाले व्यंजन इस प्रकार हैं:

झंगोरा की खीर: दूध, शक्कर और झंगोरा के मिश्रण से बनी यह मिठाई पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष अवसरों पर बनाई जाती है।
झंगोरा पुलाव: सब्जियों और मसालों के साथ पकाया गया झंगोरा पुलाव स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।
झंगोरा की रोटी: झंगोरा के आटे से बनी रोटियां स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट होती हैं।

आधुनिक समय में झंगोरा का महत्व|

आजकल, झंगोरा की मांग न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। इसके स्वास्थ्य लाभ और पोषण मूल्य के कारण, इसे सुपरफूड के रूप में मान्यता मिल रही है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पोषणविद झंगोरा को अपने आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। यह अनाज न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है बल्कि स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ और समाधान|

हालांकि झंगोरा एक महत्वपूर्ण अनाज है, इसकी खेती और प्रसार में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। इनमें से प्रमुख चुनौतियाँ हैं:

जलवायु परिवर्तन: बदलती जलवायु परिस्थितियों के कारण झंगोरा की खेती प्रभावित हो सकती है।
प्रचार-प्रसार की कमी: झंगोरा के लाभों के बारे में जागरूकता की कमी भी इसकी सीमित लोकप्रियता का एक कारण है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए निम्नलिखित समाधान प्रभावी हो सकते हैं:

वैज्ञानिक खेती तकनीकें: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए उन्नत और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

जागरूकता अभियान: झंगोरा के पोषण और स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाए जा सकते हैं।

झंगोरा एक बहुमूल्य और पौष्टिक अनाज है जो उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। इसके अनेक स्वास्थ्य लाभ और पोषण मूल्य इसे आधुनिक जीवनशैली के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं। झंगोरा की खेती को प्रोत्साहित करके और इसके उपयोग को बढ़ावा देकर हम न केवल अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ कर सकते हैं। झंगोरा के महत्व को समझते हुए, इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करना एक स्मार्ट और स्वास्थ्यवर्धक निर्णय होगा।

https://en.wikipedia.org/

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top