पहाड़ी तूअर दाल (PAHADI TOOR DAL) को हिंदी में “तुअर की दाल” के नाम से जाना जाता है।

पहाड़ी तूअर दाल (PAHADI TOOR DAL) को हिंदी में “तुअर की दाल” के नाम से जाना जाता है।

 

यह दाल भारतीय खान-पान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से उगाई जाती है। पहाड़ी तूअर दाल अपने अनोखे स्वाद, पौष्टिकता और सेहत के लिए लाभकारी गुणों के कारण प्रसिद्ध है। इस लेख में हम इस दाल के उत्पादन, पौष्टिकता, स्वास्थ्य लाभ, और इसके विभिन्न उपयोगों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

उत्पादन और उगाने की विधि|
पहाड़ी तूअर दाल मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों और उत्तरी भारत के पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती है। यहाँ की जलवायु और मिट्टी इस दाल की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है। इस दाल की खेती आमतौर पर मानसून के बाद शुरू होती है और 4-5 महीने के भीतर फसल तैयार हो जाती है।

उगाने की प्रक्रिया:

बीज की चयन: अच्छे गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना आवश्यक है। बीजों को रोग-मुक्त और उच्च उत्पादन क्षमता वाला होना चाहिए।

भूमि की तैयारी: खेती के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए। मिट्टी को जुताई करके उसमें जैविक खाद मिलाना चाहिए जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ सके।

बुवाई: बीजों की बुवाई मानसून के बाद की जाती है। बीजों को 3-4 सेमी गहराई पर बोया जाता है और पंक्तियों के बीच 30-40 सेमी की दूरी रखी जाती है।

सिंचाई: शुरूआती दिनों में सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन बाद में फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के पानी से ही सिंचाई हो जाती है। पहाड़ी तूअर दाल PAHADI

खरपतवार नियंत्रण: फसल के अच्छे उत्पादन के लिए खरपतवारों को समय-समय पर हटाना जरूरी है।

फसल की कटाई: फसल पकने के बाद उसे काटा जाता है और दानों को अलग किया जाता है।

पौष्टिकता
पहाड़ी तूअर दाल पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

इसका सेवन करने से शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषण मिलता है।

पोषक तत्व:

प्रोटीन: यह दाल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जो शरीर के विकास और मरम्मत के लिए आवश्यक है।
कार्बोहाइड्रेट: इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी अच्छी होती है, जो ऊर्जा प्रदान करते हैं।
फाइबर: फाइबर पाचन तंत्र को सही रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करता है।
विटामिन्स और मिनरल्स: इसमें विटामिन B, C और खनिज जैसे आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभकारी होते हैं।
स्वास्थ्य लाभ|  

पहाड़ी तूअर दाल के नियमित सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यह दाल न केवल पौष्टिक होती है, बल्कि कई रोगों से बचाव और उपचार में भी सहायक है।

पाचन सुधार: इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन तंत्र को सही रखने में मदद करता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है। पहाड़ी तूअर दाल PAHADI

हृदय स्वास्थ्य: यह दाल हृदय के लिए भी लाभकारी है। इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है और हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।

वजन नियंत्रण: पहाड़ी तूअर दाल में प्रोटीन और फाइबर की अधिकता होती है,

 

जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और अधिक खाने की इच्छा नहीं होती। यह वजन नियंत्रण में सहायक है।

मधुमेह नियंत्रण: यह दाल रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करती है, जिससे मधुमेह रोगियों को लाभ होता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली: इसमें पाए जाने वाले विटामिन और खनिज प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, जिससे शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

विभिन्न उपयोग
पहाड़ी तूअर दाल का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है। इसके अनोखे स्वाद और पौष्टिकता के कारण इसे भारतीय भोजन का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है।

दाल तड़का: सबसे आम और लोकप्रिय व्यंजन है दाल तड़का, जिसमें मसालों के साथ इस दाल को पकाया जाता है और तड़का लगाया जाता है।

सांबर: दक्षिण भारतीय व्यंजन सांबर में भी तूअर दाल का उपयोग किया जाता है, जो इडली, डोसा आदि के साथ खाया जाता है।

खिचड़ी:

दाल और चावल को मिलाकर खिचड़ी बनाई जाती है, जो एक हल्का और पौष्टिक भोजन है।

 

दाल पराठा: दाल को मसालों के साथ मिलाकर पराठा बनाया जाता है, जो बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।

सूप: पहाड़ी तूअर दाल से सूप भी बनाया जा सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

संक्षेप में
पहाड़ी तूअर दाल न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी होती है। इसका नियमित सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और विभिन्न बीमारियों से बचाव होता है। पहाड़ी क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी इस दाल की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है, जिससे यहाँ उगाई जाने वाली दाल की गुणवत्ता उच्च होती है। भारतीय खान-पान में इसका विशेष स्थान है और इसके विभिन्न उपयोग इसे हर घर की रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।

इस प्रकार, पहाड़ी तूअर दाल एक सम्पूर्ण और पौष्टिक आहार है, जिसे अपने भोजन में शामिल करके हम स्वस्थ और तंदुरुस्त रह सकते हैं। इसकी खेती से न केवल किसानों को लाभ होता है, बल्कि इसके सेवन से हमारी सेहत भी बेहतर होती है।

 

https://hi.wikipedia.org/wiki

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